15+ Poems On Diwali In Hindi | दिवाली पर कविताएं

आज हम आपके साथ Poems On Diwali In Hindi शेयर करने जा रहे है इस पोस्ट में आपको 15+ दिवाली पर कविताएं जानने को मिलेगी जो सभी अपने स्कूल, आयोजन एवं अन्य जगहों पर सुनाने के में सहायक होगी।

यह सभी कविताएं अच्छे एवं लोकप्रिय लेखकों द्वारा लिखी गई है, यह सभी कविताएं हम आपके साथ एक जगह संग्रहित करके शेयर कर रहे है जिसे आप पढ़ सकते है, poem को अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हो एवं आप इसे किसी प्रोजेक्ट में भी इस्तेमाल कर सकते हो। 

Poems On Diwali In Hindi

Poems On Diwali In Hindi

दिवाली हिंदुओं का त्यौहार है , यह हिन्दू धर्म में सबसे लोकप्रिय त्यौहार में से एक है यह सभी छोटे बड़े लोग मनाते है यह त्यौहार अँधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतिक है। 

जब श्री राम 14 वर्ष वनवास पूर्ण होने के बाद वापस अयोध्या आये थे तब सभी लोगो ने उनका स्वागत किया था और खुशी से दीप जला के फूलो की वर्षा की थी एवं दिवाली मनाया था तभी से दीवाली त्यौहार बनाया जाता है। आप इन कविताओं को अपने दोस्तों के साथ शेयर करके उन्हें दीवाली विश भी कर सकते हो। 

इस पोस्ट में 2 तरह की कविताएं हम शेयर कर रहे है 1. जो की short में है एवं 2nd जो की long या normal है तो चलिए जानते है इन कविताओं को। 

Diwali Poem In Hindi Of 10 Lines [short poem on Diwali In Hindi]

ये सभी कविताये हमने इंटरनेट पर से एवं सोशल साइट से कलेक्ट की है ये हमारे द्वारा लिखी गयी नहीं है इन कविताओं को कवियों के द्वारा लिखा गया है इसलिए मै आभारी हु उन सभी कवियों के लिए जिन्होंने बेहतरीन कविताओं को लिखा है।

दीप जलाओ दीप जलाओ

दीप जलाओ दीप जलाओ

आज दिवाली रे |

खुशी-खुशी सब हँसते आओ

आज दिवाली रे।

मैं तो लूँगा खील-खिलौने

तुम भी लेना भाई

नाचो गाओ खुशी मनाओ

आज दिवाली आई।

आज पटाखे खूब चलाओ

आज दिवाली रे

दीप जलाओ दीप जलाओ

आज दिवाली रे।

नए-नए मैं कपड़े पहनूँ

खाऊँ खूब मिठाई

हाथ जोड़कर पूजा कर लूँ

आज दिवाली आई।

 दीपावली का त्योहार आया

 दीपावली का त्योहार आया,

साथ में खुशियों की बहार लाया।

दीपको की सजी है कतार,

जगमगा रहा है पूरा संसार।

अंधकार पर प्रकाश की विजय लाया,

दीपावली का त्योहार आया।

सुख-समृद्धि की बहार लाया,

भाईचारे का संदेश लाया।

बाजारों में रौनक छाई,

दीपावली का त्योहार आया।

किसानों के मुंह पर खुशी की लाली आयी,

सबके घर फिर से लौट आई खुशियों की रौनक।

दीपावली का त्यौहार आया,

साथ में खुशियों की बहार लाया।

मंगलमय हो आपको दीपों का त्यौहार

मंगलमय हो आपको दीपों का त्यौहार,

जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार,

ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार,

लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार…

मुझको जो भी मिलना हो, वह तुमको ही मले दोलत,

तमन्ना मेरे दिल की है, सदा मिलती रहे शोहरत,

सदा मिलती रहे शोहरत, रोशन नाम तेरा हो

कामो का ना तो शाया हो निशा में न अँधेरा हो…

दिवाली आज आयी है, जलाओ प्रेम के दीपक

जलाओ प्रेम के दीपक, अँधेरा दूर करना है

दिलों में जो अँधेरा है, उसे हम दूर कर देंगे

मिटा कर के अंधेरों को, दिलो में प्रेम भर देंगे…

मनाएं हम तरीकें से तो रोशन ये चमन होगा

सारी दुनियां से प्यारा और न्यारा ये वतन होगा

धरा अपनी, गगन अपना, जो बासी वो भी अपने हैं

हकीकत में वे बदलेंगे, दिलों में जो भी सपने हैं…

Poem on Diwali in Hindi For Class 1, 2, 3, 6

आई रे आई जगमगाती

आई रे आई जगमगाती रात है आई

दीपों से सजी टिमटिमाती बारात हैं आई

हर तरफ है हंसी ठिठोले

रंग-बिरंगे, जग-मग शोले

परिवार को बांधे हर त्यौहार

खुशियों की छाए जीवन में बहार

सबके लिए हैं मनचाहे उपहार

मीठे मीठे स्वादिष्ट पकवान

कराता सबका मिलन हर साल

दीपावली का पर्व सबसे महान

आई रे आई जगमगाती रात है आई..

आई रे आई जगमगाती रात

आई रे आई जगमगाती रात है आई

दीपों से सजी टिमटिमाती बारात हैं आई

हर तरफ है हंसी ठिठोले

रंग-बिरंगे, जग-मग शोले

परिवार को बांधे हर त्यौहार

खुशियों की छाए जीवन में बहार

सबके लिए हैं मनचाहे उपहार

मीठे मीठे स्वादिष्ट पकवान

कराता सबका मिलन हर साल

दीपावली का पर्व सबसे महान

आई रे आई जगमगाती रात है आई..

इस साल दिवाली कुछ इस तरह

इस साल दिवाली कुछ इस तरह मनाना दोस्तों

नफरत को भुलाकर दीप खुशियों के जलाना दोस्तों

न रह जाये कोई गम न कोई शिकायत

दीप की दीवारों पर खुशियों के रंग लगाना दोस्तों..

धनतेरस पर बहुत लिया घर का सामान

इस साल किसी गरीब का घर सजाना दोस्तों..

भाई बहन के प्यार का भी है ये त्यौहार

भाई दोज पर रूठी बहन को मनाना दोस्तों..

दूर कर देना अंधेरों को मिटा देना अहंकार को

दीपक की तरह जगमगाना दोस्तों..

कुछ इस तरह दिलो को जोड़ना दिलो से

सिर्फ अपनों को नहीं परायों को भी अपना बनाना दोस्तों…

इस साल दिवाली कुछ इस तरह मनाना दोस्तों…

आज रौशन अँधेरे हुए

आज रौशन अँधेरे हुए

रात में भी सवेरे हुए।

चाँद तारों की औकात क्या

आज तो हम भी तेरे हुए।

गोपियाँ आज सारी खड़ी

तट पे कान्हा को घेरे हुए।

रूठिए यों न हमसे सनम

बैठिए मुँह न फेरे हुए।

रहजनों का हमें खौफ क्या

अब तो रहबर लुटेरे हुए।

नाम जब जब तुम्हारा सुना

ग़म के बादल घनेरे हुए।

हर घर दीप जग मगाए

हर घर दीप जग मगाए तो दिवाली आयी हैं,

लक्ष्मी माता जब घर पर आये तो दिवाली आयी हैं!

दो पल के ही शोर से क्या हमें ख़ुशी मिलेंगी,

दिल के दिए जो मिल जाये तो दिवाली आयी हैं !

घर की साफ सफ़ाई से घर चमकाएँ तो दिवाली आयी हैं,

पकवान – मिठाई सब मिल कर खाएं तो दिवाली आयी हैं!

फटाकों से रोशनी तो होंगी लेकिन धुँआ भी होंगा,

दिए नफ़रत के बुज जाएँ तो दिवाली आयी हैं!

इस दिवाली सबके लिए यही सन्देश हैं की

इस दिवाली हम लक्ष्मी का स्वागत दियों के करे,

फटाकों के शोर और धुएं से नहीं

इस बार दिवाली प्रदुषण मुक्त मनायेंगे!

Hindi Diwali Poem For Kids

जलाई जो तुमने

जलाई जो तुमने-

है ज्योति अंतस्तल में ,

जीवन भर उसको

जलाए रखूँगा |

तन में तिमिर कोई

आये न फिर से,

ज्योतिगर्मय मन को

बनाए रखूँगा |

आंधी इसे उडाये नहीं

घर कोइ जलाए नहीं

सबसे सुरक्षित

छिपाए रखूँगा |

चाहे झंझावात हो,

या झमकती बरसात हो

छप्पर अटूट एक

छवाए रखूँगा |

दिल-दीया टूटे नहीं,

प्रेम घी घटे नहीं,

स्नेह सिक्त बत्ती

बनाए रखूँगा |

मैं पूजता नो उसको ,

पूजे दुनिया जिसको ,

पर, घर में इष्ट देवी बिठाए |

long poem on Diwali In Hindi

मन से मन का दीप जलाओ

मन से मन का दीप जलाओ

जगमग-जगमग दि‍वाली मनाओ

धनियों के घर बंदनवार सजती

निर्धन के घर लक्ष्मी न ठहरती

मन से मन का दीप जलाओ

घृणा-द्वेष को मिल दूर भगाओ

घर-घर जगमग दीप जलते

नफरत के तम फिर भी न छंटते

जगमग-जगमग मनती दिवाली

गरीबों की दिखती है चौखट खाली

खूब धूम धड़काके पटाखे चटखते

आकाश में जा ऊपर राकेट फूटते

काहे की कैसी मन पाए दिवाली

अंटी हो जिसकी पैसे से खाली

गरीब की कैसे मनेगी दीवाली

खाने को जब हो कवल रोटी खाली

दीप अपनी बोली खुद लगाते

गरीबी से हमेशा दूर भाग जाते

अमीरों की दहलीज सजाते

फिर कैसे मना पाए गरीब दि‍वाली

दीपक भी जा बैठे हैं बहुमंजिलों पर

वहीं झिलमिलाती हैं रोशनियां

पटाखे पहचानने लगे हैं धनवानों को

वही फूटा करती आतिशबाजियां

यदि एक निर्धन का भर दे जो पेट

सबसे अच्छी मनती उसकी दि‍वाली

हजारों दीप जगमगा जाएंगे जग में

भूखे नंगों को यदि रोटी वस्त्र मिलेंगे

दुआओं से सारे जहां को महकाएंगे

आत्मा को नव आलोक से भर देगें

फुटपाथों पर पड़े रोज ही सड़ते हैं

सजाते जिंदगी की वलियां रोज है

कौन-सा दीप हो जाए गुम न पता

दिन होने पर सोच विवश हो जाते|

– डॉ मधु त्रिवेदी

मनानी है ईश कृपा से

मनानी है ईश कृपा से इस बार दीपावली,

वहीं……… उन्हीं के साथ जिनके कारण

यह भव्य त्योहार आरम्भ हुआ …….

और वह भी उन्हीं के धाम अयोध्या जी में,

अपने घर तो हर व्यक्ति मना लेता है दीपावली

परन्तु इस बार यह विचित्र इच्छा मन में आई है……….

हाँ …छोटी दीवाली तो अपने घर में ही होगी,

पर बड़ी रघुनन्दन राम सियावर राम जी के साथ |

कितना आनन्द आएगा जब जन्म भूमि में

रघुवर जी के साथ मैं छोड़ूँगा पटाखे और फुलझड़ियाँ…….

जब मैं उनकी आरती करूँगा

जब मैं दीए उनके घर में जलाऊंगा

उस आनन्द का कैसे वर्णन करूँ जो

इस जीवन को सफल बनाएगा |

मैं गर्व से कहूँगा कि हाँ मैने इस जीवन का

सच्चा आनन्द आज ही प्राप्त किया है

अपलक जब मैं रघुवर को जब उन्हीं के भवन में

निहारूँगी वह क्षण परमानन्द सुखदायी होंगें |

हे रघुनन्दऩ कृपया जल्द ही मुझे वह दिन दिखलाओ

इन अतृप्त आँखों को तृप्त कर दो

चलो इस बार की दीपावली मेरे साथ मनाओ

इच्छा जीने की इसके बाद समाप्त हो जाएगी

क्योंकि सबसे प्रबल इच्छा जो मेरी तब पूरी हो जाएगी|

जब मन में हो मौज बहारों की

जब मन में हो मौज बहारों की

चमकाएं चमक सितारों की,

जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों

तन्हाई में भी मेले हों,

आनंद की आभा होती है

उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है,

जब प्रेम के दीपक जलते हों

सपने जब सच में बदलते हों,

मन में हो मधुरता भावों की

जब लहके फ़सलें चावों की,

उत्साह की आभा होती है

उस रोज दिवाली होती है,

जब प्रेम से मीत बुलाते हों

दुश्मन भी गले लगाते हों,

जब कहीं किसी से वैर न हो

सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,

अपनत्व की आभा होती है

उस रोज़ दिवाली होती है,

जब तन-मन-जीवन सज जायें

सद्-भाव  के बाजे बज जायें,

महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की

मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,

तृप्ति की आभा होती  है

उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है|

इस दिवाली मैं नहीं आ पाऊँगा

इस दिवाली मैं नहीं आ पाऊँगा,

तेरी मिठाई मैं नहीं खा पाऊँगा,

दिवाली है तुझे खुश दिखना होगा,

शुभ लाभ तुझे खुद लिखना होगा |

तू जानती है यह पूरे देश का त्योहार है

और यह भी मां कि तेरा बेटा पत्रकार है|

मैं जानता हूँ,

पड़ोसी के बच्चे पटाखे जलाते होंगे,

तोरन से अपना घर सजाते होंगे,

तु मुझे बेतहाशा याद करती होगी,

मेरे आने की फरियाद करती होगी |

मैं जहाँ रहूँ मेरे साथ तेरा प्यार है,

तू जानती है न माँ तेरा बेटा पत्रकार है|

भोली माँ मैं जानता हूँ,

तुझे मिठाईयों में फर्क नहीं आता है,

मोलभाव करने का तर्क नहीं आता है,

बाजार भी तुम्हें लेकर कौन जाता होगा,

पूजा में दरवाजा तकने कौन आता होगा|

तेरी सीख से हर घर मेरा परिवार है

तू समझती है न माँ तेरा बेटा पत्रकार है|

मैं समझता हूँ,

माँ बुआ दीदी के घर प्रसाद कौन छोड़ेगा,

अब कठोर नारियल घर में कौन तोड़ेगा,

तू गर्व कर माँ……..

कि लोगों की दिवाली अपनी अबकी होगी,

तेरे बेटे के कलम की दिवाली सबकी होगी |

लोगों की खुशी में खुशी मेरा व्यवहार है

तू जानती है न माँ तेरा बेटा पत्रकार है…

दीपो से महके संसार

दीपो से महके संसार

फुलझड़ियो की हो झलकार

रंग-बिरंगा है आकाश

दीपों की जगमग से आज

हँसते चेहरे हर कहीं

दिखते है प्यारे-प्यारे से

दीवाली के इस शुभ दिन पर

दीपक लगते है प्यारे से |

मुन्ना- मुन्नी गुड्डू-गुड्डी ,

सबके मन में है हसी-ख़ुशी

बर्फी पेठे गुलाब जामुन पर

देखो सबकी नज़र गड़ी

बजते बम रोकेट अनार पटाखे |

दिखते है प्यारे-प्यारे से

दीवाली के इस शुभ-दिन पर

दीपक लगते है प्यारे से |

मन में ख़ुशी दमकती है

होठो से दुआ निकलती है

इस प्यारे से त्यौहार में

आखें ख़ुशी से झलकती है

आओ मिलकर अब हम बाटें

हँसी-ख़ुशी हर चेहरे में

दीवाली के इस शुभ-दिन पर

दीपक लगते है प्यारे से

जाएंगे दिवाली पर हम

जाएंगे दिवाली पर हम,

नानीजी के घर।

लिपा-पुता होगा घर-आंगन,

द्वारे-द्वारे गेरू वंदन।

दीप जलेंगे तब भागेगा,

अंधियारा डरकर।

जाएंगे दिवाली पर हम,

नानीजी के घर।

खूब जलाएंगे हम सब मिल,

महताबें, फुलझड़ियां।

बिखर जाएंगी धरती पर ज्यों,

हों फूलों की लड़ियां।

उड़ जाएंगे दूर गगन में,

रॉकेट सर सर सर…।

जाएंगे दिवाली पर हम,

नानीजी के घर।

गांवों के ऐसे गरीब जो,

नहीं मिठाई खाते।

दीप पर्व पर ही बेचारे,

भूखे ही सो जाते।

खील‍-खिलौने बांटेंगे हम

उनको जी भरकर।

जाएंगे दिवाली पर हम,

नानीजी के घर।

– डॉ. देशबंधु शाहजहांपुरी

झिलमिल करते दीपक न्यारे

आसमान से उतरे तारे,

झिलमिल करते दीपक न्यारे!

हँसी ख़ुशी का मौसम आया,

संग कई सौगातें लाया,

सबने अपने ही हाथों से,

घर आँगन को खूब सजाया…

वंदनवार सजे हर द्वारे,

झिलमिल करते दीपक न्यारे.

दीपों की सजी है बारात,

तिमिर भूला अपनी औकात…

सप्तरंग की लड़ियाँ सजती,

घूम धड़ाके आज की रात..

ऊँच – नीच की मिटें मीनारें,

झिलमिल करते दीपक न्यारे..

खिल खिल करके हँसते अनार,

फिरकी हरदम खड़ी तैयार,

फुलझड़ी की आभा न्यारी,

चहूँ तरह फैला अंगार…

हँसी ख़ुशी को बाटें सारे,

झिलमिल करते दीपक न्यारे!

अंधेरे बहुत है मेंरी जिंदगी मैं

अंधेरे बहुत है मेंरी जिंदगी मैं,

तारे दिल मैं कोई जोत जलना चाहते है,

क्या करूंगा जलाकर दिये,

जब तेरे इश्क से दिल रोशन कर लिया है,

तेरे साथ हर दिन दीपावली सा लगता है,

बिन तेरे ये भी खाली सा लगता हैं

लो दीपावली भी आ गयी पर खुशिया कहा है,

कुछ है भी या कुछ भी नही है,

पर हां बाहार शोर बहुत है,

एक दीप तेरे नाम का हमेशा जलता रहेगा,

ये मेरी दीपावली कभी खत्म नही होगी

दिल जलाओ या दिए आखो के दरवाजे पर,

वक्त से पहले तो आते नही आने वाले

कल रोशन की बरसात थी,

आज फिर अँधेरी रात,दीपावली का त्योहार आया

बुझते हुए दियो ने हमको भी बुझा दिया

दिल में जला के रखा है तेरी यादो का दिया,

तुम सब आज दीपावली मनाओ,

हम हर रोज दीपावली मनाते है

झिलमिलाते दियो की रौशनी से सजी महफिल बड़ा सताती है,

उसके साथ मनाए वो दीपावली मुझे

बहुत याद आती है…!

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Final thought 

इस पोस्ट में हमने 15+ Diwali Poem In Hindi शेयर की है जिसे आप दोस्तों को विश करने, समारोह या स्कूल में सुनाने एवं अन्य कामो में इस्तेमाल कर सकते हो। मुझे उम्मीद है आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आयी होगी। 

अगर इस पोस्ट से जुड़ी कोई प्रश्न है तो कमेंट करके जरूर पूछे एवं अगर यह पोस्ट आपको पसंद आयी है तो अपने दोस्तों के साथ फेसबुक, whatsapp एवं अन्य सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करे। 

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