26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कविता | Poem On Republic Day In Hindi

इस पोस्ट में हम आपके साथ Poems On Republic Day In Hindi शेयर करने जा रहे है जिसे आप अपने स्कूल, कॉलेज एवं ऑफिस में गणतंत्र दिवस के दिन आयोजित कार्यक्रम में सुनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हो, मुझे उम्मीद है आपको यह कविताएं जरूर पसंद आएगी।

सबसे पहले आप सभी भारत देशवासियों को भारतीय गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। इस पोस्ट में हमने आपके साथ बेहतरीन 10+ Hindi Poem On Republic Day शेयर की है जिसे प्रसिद्ध लेखकों के द्वारा लिखा गया है। 

Poem On Republic Day In Hindi

Republic Day Poem In Hindi

 गणतंत्र दिवस हम सब भारतवासियो के लिए बहुत ही ख़ास दिन है 26 जनवरी 1950 में भारत का संविधान लागु हुआ था इस दिन को याद करने के लिए गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं इस दिन स्कूल, कॉलेज एवं सभी दफ्तर में झंडा फहराया जाता है और कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है ,

जहां छोटे – बड़े सभी कविताएं सुनाते है , गीत गाते है एवं अन्य भी चीज़े होती है अगर आप भी इसमें भाग लेना चाहते है तो यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी होने वाली है इसमें शेयर गयी कविताओं को आप भी सुना सकते हो तो चलिए जानते है –

Short Poem On Republic Day In Hindi

ये सभी कविताये हमने इंटरनेट पर से एवं सोशल साइट से कलेक्ट की है ये हमारे द्वारा लिखी गयी नहीं है इन कविताओं को कवियों के द्वारा लिखा गया है इसलिए मै आभारी हु उन सभी कवियों के लिए जिन्होंने बेहतरीन कविताओं को लिखा है।

मोह निंद्रा में सोने वालों

मोह निंद्रा में सोने वालों, अब भी वक्त है जाग जाओ,

इससे पहले कि तुम्हारी यह नींद राष्ट्र को ले डूबे,

जाति-पाती में बंटकर देश का बन्टाधार करने वालों,

अपना हित चाहते हो, तो अब भी एक हो जाओ,

भाषा के नाम पर लड़ने वालों,

हिंदी को जग का सिरमौर बनाओ,

राष्ट्र हित में कुछ तो बलिदान करो तुम,

इससे पहले कि राष्ट्र फिर गुलाम बन जाए,

आधुनिकता केवल पहनावे से नहीं होती है,

ये बात अब भी समझ जाओ तुम,

फिर कभी कहीं कोई भूखा न सोए,

कोई ऐसी क्रांति ले आओ तुम,

भारत में हर कोई साक्षर हो,

देश को ऐसे पढ़ाओ तुम||

जब सूरज संग हो जाए 

जब सूरज संग हो जाए अंधियारों के साथ

तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है।

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में

तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है।

जब देश को खतरा हो गद्दारों से

तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है।

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का

तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है।

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में

तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है।

जब नारी खुद को असहाय पाए

तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है।

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश

तो फिर सुभाष का आना जरूरी है।

जब सीधे तरीकों से देश न बदले

तब विद्रोह जरूरी है।

वतन की सर-ज़मीं से इश्क़ 

वतन की सर-ज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं

खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं

ज़रूरत हो तो मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं

ये जुरअत ये शुजाअत ये बसालत हम भी रखते हैं

ज़माने को हिला देने के दावे बाँधने वालो

ज़माने को हिला देने की ताक़त हम भी रखते हैं

बला से हो अगर सारा जहाँ उन की हिमायत पर

ख़ुदा-ए-हर-दो-आलम की हिमायत हम भी रखते हैं

बहार-ए-गुलशन-ए-उम्मीद भी सैराब हो जाए

करम की आरज़ू ऐ अब्र-ए-रहमत हम भी रखते हैं

गिला ना-मेहरबानी का तो सब से सुन लिया तुम ने

तुम्हारी मेहरबानी की शिकायत हम भी रखते हैं

भलाई ये कि आज़ादी से उल्फ़त तुम भी रखते हो

बुराई ये कि आज़ादी से उल्फ़त हम भी रखते हैं

हमारा नाम भी शायद गुनहगारों में शामिल हो

जनाब-ए-‘जोश’ से साहब सलामत हम भी रखते हैं

उस माँ को याद करो जिसने

उस माँ को याद करो जिसने

खून से चुन्नर भिगोली!!

कुछ कर गुजरने की अगर

तमन्ना उठती हो दिल में

भारत माँ का नाम सजाओ

दुनिया की महफिल में!!

किसकी राह देख रहा

तुम खुद सिपाही बन जाना

सरहद पर ना सही

सीखो अँधियारों से लड़ पाना!!

यह मेरा आजाद तिरंगा

यह मेरा आजाद तिरंगा

लहर लहर लहराए रे

भारत माँ मुस्काए तिरंगा

लहर लहर लहराए रे!!

इस झंडे का बापू जी ने

कैसा मान बढ़ाया है

लाल किले पर नेहरू जी

ने यह झंडा फहराया!!

माह जनवरी छब्बीस को हम

सब गणतंत्र मनाते

और तिरंगे को फहरा कर,

गीत ख़ुशी के गाते!!

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है|

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है|

जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है|

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है|

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है|

जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है|

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है|

जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है||

Poem For Republic Day In Hindi

तेरी जिंदगी से बहुत दूर चले जाना है

तेरी जिंदगी से बहुत दूर चले जाना है,

फिर न लौट कर इस दुनिया में आना है,

बस अब बहुत हुआ,

अब किसी का भी चेहरा इस दिल में कभी नहीं बसाना है,

तुम्हारी जिंदगी में अब मैं नहीं,

तुम्हारी जिंदगी में अब कोई और सही,

पर मेरे दिल में तुम हमेशा रहोगे,

मेरा अधूरा ख्वाब बनकर, मेरे हमनशीं,

न कर मुझे याद करके मुझपर और एहसान,

ऐसा न हो मुझे पाने की तमन्ना में,

चली जाए तेरी जान,

मैं भी कोशिश करूँगा भुलाने की तुझे,

नहीं तो हो जाऊँगा तेरे नाम पर कुर्बान ,

हसरतें दिल में दबी रह गयी,

तुझे पाकर भी जिंदगी में कुछ कमी रह गयी,

आँखों में तड़प और दिल में दर्द अब भी है,

न जाने तेरे जाने के बाद भी,

आँखों में नमी रह गयी,

मन करता है जो दर्द है दिल में,

बयां कर दूँ हर दर्द तुझसे,

अब ये दर्द छुपाए नहीं जाते,

लेकिन नहीं कह सकता कुछ तुझसे,

क्योंकि दिलो के दर्द दिखाए नहीं जाते!

आओ तिरंगा लहराये

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये;

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

अपना 71वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे;

देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,

भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,

थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,

था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,

पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,

थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

माह जनवरी छब्बीस को हम

माह जनवरी छब्बीस को हम

सब गणतंत्र मनाते |

और तिरंगे को फहरा कर,

गीत ख़ुशी के गाते ||

संविधान आजादी वाला,

बच्चो ! इस दिन आया |

इसने दुनिया में भारत को,

नव गणतंत्र बनाया ||

क्या करना है और नही क्या ?

संविधान बतलाता |

भारत में रहने वालों का,

इससे गहरा नाता ||

यह अधिकार हमें देता है,

उन्नति करने वाला |

ऊँच-नीच का भेद न करता,

पण्डित हो या लाला ||

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,

सब हैं भाई-भाई |

सबसे पहले संविधान ने,

बात यही बतलाई ||

इसके बाद बतायी बातें,

जन-जन के हित वाली |

पढ़ने में ये सब लगती हैं,

बातें बड़ी निराली ||

लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी,

ऊँचे पद पा सकते |

और बढ़ा व्यापार नियम से,

दुनिया में छा सकते ||

देश हमारा, रहें कहीं हम,

काम सभी कर सकते |

पंचायत से एम.पी. तक का,

हम चुनाव लड़ सकते ||

लेकर सत्ता संविधान से,

शक्तिमान हो सकते |

और देश की इस धरती पर,

जो चाहे कर सकते ||

लेकिन संविधान को पढ़कर,

मानवता को जाने |

अधिकारों के साथ जुड़ें,

कर्तव्यों को पहचानो ||

गणतंत्र भारत का निर्माण

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी,

दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी।।

है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना;

न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,

एक तरफ विदेशी हमलों की मार,

दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,

पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,

विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,

एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,

छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी,

जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी,

जिसकी नायिका झांसी की रानी आजादी की दिवानी थी,

देश भक्ति के रंग में रंगी वो एक मस्तानी थी,

जिसने देश हित के लिये स्वंय को बलिदान करने की ठानी थी,

उसके साहस और संगठन के नेतृत्व ने अंग्रेजों की नींद उड़ायी थी,

हरा दिया उसे षडयंत्र रचकर, कूटनीति का भंयकर जाल बुनकर,

मर गयी वो पर मरकर भी अमर हो गयी,

अपने बलिदान के बाद भी अंग्रेजों में खौफ छोड़ गयी|

उसकी शहादत ने हजारों देशवासियों को नींद से उठाया था,

अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक नयी सेना के निर्माण को बढ़ाया था,

फिर तो शुरु हो गया अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का सिलसिला,

एक के बाद एक बनता गया वीरों का काफिला,

वो वीर मौत के खौफ से न भय खाते थे,

अंग्रेजों को सीधे मैदान में धूल चटाते थे,

ईट का जवाब पत्थर से देना उनको आता था,

अंग्रेजों के बुने हुये जाल में उन्हीं को फसाना बखूबी आता था|

खोल दिया अंग्रेजों से संघर्ष का दो तरफा मोर्चा,

1885 में कर डाली कांग्रेस की स्थापना,

लाला लाजपत राय, तिलक और विपिन चन्द्र पाल,

घोष, बोस जैसे अध्यक्षों ने की जिसकी अध्यक्षता,

इन देशभक्तों ने अपनी चतुराई से अंग्रेजों को राजनीति में उलझाया था,

उन्हीं के दाव-पेचों से अपनी माँगों को मनवाया था|

सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग को गाँधी ने अपनाया था,

कांग्रेस के माध्यम से ही उन्होंने जन समर्थन जुटाया था,

दूसरी तरफ क्रान्तिकारियों ने भी अपना मोर्चा लगाया था,

बिस्मिल, अशफाक, आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे,

क्रान्तिकारियों से देशवासियों का परिचय कराया था,

अपना सर्वस्व इन्होंने देश पर लुटाया था,

तब जाकर 1947 में हमने आजादी को पाया था|

एक बहुत बड़ी कीमत चुकायी है हमने इस आजादी की खातिर,

न जाने कितने वीरों ने जान गवाई थी देश प्रेम की खातिर,

निभा गये वो अपना फर्ज देकर अपनी जाने,

निभाये हम भी अपना फर्ज आओ आजादी को पहचाने,

देश प्रेम में डूबे वो, न हिन्दू, न मुस्लिम थे,

वो भारत के वासी भारत माँ के बेटे थे|

उन्हीं की तरह देश की शरहद पर हरेक सैनिक अपना फर्ज निभाता है,

कर्तव्य के रास्ते पर खुद को शहीद कर जाता है,

आओ हम भी देश के सभ्य नागरिक बने,

हिन्दू, मुस्लिम, सब छोड़कर, मिलजुलकर आगे बढ़े,

जातिवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद, ये देश में फैली बुराई है,

जिन्हें किसी और ने नहीं देश के नेताओं ने फैलाई है,

अपनी कमियों को छिपाने को देश को भरमाया है,

जातिवाद के चक्र में हम सब को उलझाया है|

अभी समय है इस भ्रम को तोड़ जाने का,

सबकुछ छोड़ भारतीय बन देश विकास को करने का,

यदि फसे रहे जातिवाद में, तो पिछड़कर रह जायेंगे संसार में,

अभी समय है उठ जाओं वरना पछताते रह जाओगें,

समय निकल जाने पर हाथ मलते रह जाओगे,

भेदभाव को पीछे छोड़ सब हिन्दुस्तानी बन जाये,

इस गणतंत्र दिवस पर मिलजुलकर तिरंगा लहराये।।

आज तिरंगा फहराते है

आज तिरंगा फहराते है

अपनी पूरी शान से

हमें मिली आजादी

वीर शहीदों के बलिदान से!!

आजादी के लिए हमारी

लंबी चली लड़ाई थी

लाखों लोगों ने प्राणों से

कीमत बड़ी चुकाई थी!!

व्यापारी बनकर आए और

छल से हम पर राज किया

हमको आपस में लड़वाने की

नीति पर उन्होंने काम किया!!

हमने अपना गौरव पाया

अपने स्वाभिमान से

हमें मिली आज़ादी

वीर शहीदों के बलिदान से!!

गांधी, तिलक, सुभाष,

जवाहर का प्यारा यह देश है

जियो और जीने दो का

सबको देता संदेश है!!

लगी गूंजने दसों दिशाएं

वीरों के यशगान से

हमें मिली आजादी वीर

शहीदों के बलिदान से!!

हमें हमारी मातृभूमि से

इतना मिला दुलार है

उसके आंचल की छाया से

छोटा यह संसार है!!

विश्व शांति की चली हवाएं

अपने हिंदुस्तान से

हमें मिली आज़ादी

वीर शहीदों के बलिदान से!!

संविधान आजादी वाला

संविधान आजादी वाला,

बच्चो ! इस दिन आया

इसने दुनिया में भारत को,

नव गणतंत्र बनाया!

क्या करना है और नही क्या ?

संविधान बतलाता

भारत में रहने वालों का,

इससे गहरा नाता!!

यह अधिकार हमें देता है,

उन्नति करने वाला

ऊँच-नीच का भेद न करता,

पण्डित हो या लाला!!

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,

सब हैं भाई-भाई

सबसे पहले संविधान ने,

बात यही बतलाई!!

इसके बाद बतायी बातें,

जन-जन के हित वाली

पढ़ने में ये सब लगती हैं,

बातें बड़ी निराली!!

लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी,

ऊँचे पद पा सकते

और बढ़ा व्यापार नियम से,

दुनिया में छा सकते!!

देश हमारा, रहें कहीं हम,

काम सभी कर सकते

पंचायत से एम.पी. तक का,

हम चुनाव लड़ सकते!!

लेकर सत्ता संविधान से,

शक्तिमान हो सकते

और देश की इस धरती पर,

जो चाहे कर सकते!!

लेकिन संविधान को पढ़कर,

मानवता को जाने

अधिकारों के साथ जुड़ें,

कर्तव्यों को पहचानो!!

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Conclusion 

इस पोस्ट में हमने आपके साथ Republic Day Poem In Hindi शेयर की है जिसे आप गणतंत्र दिवस के दिन अपने स्कूल, कॉलेज एवं ऑफिस में सुना सकते हो मुझे उम्मीद है कि यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी। 

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