[पद – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण] | pad kise kahate hain?

Advertisements

आज के इस पोस्ट में हम पद किसे कहते हैं एवं इससे जुड़े जैसे – परिभाषा, भेद एवं अन्य जानकारियां जानेंगे तो अगर आप अगर pad kise kahate hain के बारे में जानकारी ढूंढ रहे थे तो आप सही जगह आये हो। 

पद किसे कहते हैं? (pad kise kahate hain?)

यदि हम हिंदी भाषा के व्याकरण में पद की बाते करे तो जैसा की आमतौर पर हम जानते हैं हिंदी व्याकरण में किसी अक्षर को वर्ण कहते है और इन वर्णों के समूह को मिलाकर जो भिन्न भिन्न शब्द बनता है उसे ही हम हिंदी भाषा के व्याकरण में पद के नाम से जाना जाता है।

Advertisements

हिंदी के व्याकरण में जब कुछ अक्षरों के समूह को मिलाकर एक शब्द बनाया जाता है और उन्हीं शब्दों के समूह को मिला कर और जोड़ कर एक नया वाक्य बनाया जाता है तो वह हिंदी के व्याकरण के नियमों में शामिल हो जाता है सरल भाषा में इसका अर्थ है कि हिंदी व्याकरण में शब्द का दूसरा मतलब ही पद होता है।

Pad ki paribhasha kya hai?

पद हिंदी व्याकरण का एक आवश्यक भाग होता है अर्थात् शब्द के दूसरे भाग या अंग ही पद कहलाता है।

उदहारण के लिए :  

Advertisements
  • श्याम ने मुरली बजाया। 
  • राज ने गाना गाया।

उपर्युक्त पंक्ति में श्याम एक शब्द है एवं यह एक वाक्य के रुप में प्रतीत होता है और यही वाक्य अब शब्द बन जाता है, क्योंकि यह वाक्य के नियमानुसार है।

आमतौर पर पद के उदाहरण कुछ इसी प्रकार से है। जैसे: राम, जाना, खेलना, नहाना, सोना इत्यादि। अब यदि हम इन शब्दों को मिला कर कोई वाक्य बनाते हैं, जैसे : राम खेलने जाता है। तो यहां जो शब्दों से मिलकर वाक्य बन रहा है उसे ही पद के नाम से जाना जाता है।

पद के भेद कितने हैं? (pad ke bhed kitne hain?)

पद के कितने भेद होते हैं? (pad ke kitne bhed hote hain?) की बात करें तो यह बता दें कि हिंदी के व्याकरण के अनुसार, पद को कुल पांच भागों में बांटा जा सकता है जो निम्नांकित है-

1. संज्ञा

2. सर्वनाम 

3. विशेषण

4. क्रिया

5. अव्यव

संज्ञा किसे कहते हैं ?

संज्ञा किसे व्यक्ति, जाति, प्राणी, स्थान, गुण के साथ द्रव्य और भाव इत्यादि के नाम को संज्ञा कहा जाता हैं।

जैसे: मोहन, क्षत्रिय, बकरी, किताब इत्यादि।

संज्ञा को कुछ इस प्रकार से कई भाग में विभाजित किया जा सकता है-

संज्ञा के प्रकार: संज्ञा निम्नलिखित पांच प्रकार के होते हैं।

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा
  • जातिवाचक संज्ञा
  • भाववाचक संज्ञा
  • द्रव्यवाचक संज्ञा
  • समुदायवाचक संज्ञा

व्यक्तिवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा से किसी विशेष व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, स्थान तथा नाम आदि का बोध किया जाता हो उसे ही व्यक्तिवाचक संज्ञा कहा जाता हैं। जैसे: शिमला, हिमालय, राहुल, टेबल, कुत्ता आदि।

जातिवाचक संज्ञा – जिन शब्दों से किसी वस्तु या प्राणी या मनुष्य की समस्त जाति का बोध होता हो उन शब्दों को ही जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है जैसे: गाय, बकरी, मछली, हाथी, मनुष्य इत्यादि।

भाववाचक संज्ञा – जिस शब्द से किसी भी पदार्थ की अवस्था, गुण-दोष के साथ उसके भाव और धर्म आदि का बोध होता हो उसे ही भाववाचक संज्ञा कहा जाता है जैसे : बचपन, मोटापा, वृद्धावस्था, खट्टा-मीठा आदि।

द्रव्यवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा के शब्द से किसी भी धातु या द्रव्य आदि शब्द का बोध होता जो उसे ही हम द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं जैसे : तेल, घी, सोना, चांदी, लोहा, चावल इत्यादि।

समुदायवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा के शब्द से किसी भी व्यक्ति या वस्तु आदि के समूह का बोध होता हो उसे ही समुदाय वाचक संज्ञा कहा जाता है जैसे– वर्ग, सभा, कक्षा, सेना, फौज इत्यादि।

सर्वनाम के पद से क्या आशय होता है?

जिन शब्दों का उपयोग किसी भी मनुष्य, वस्तु , जगह, धर्म आदि के स्थान पर या संज्ञा के बदले में जो शब्दों का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है हिंदी व्याकरण में उसे ही सर्वनाम कहा जाता है। 

जैसे- किसी भी मनुष्य के नाम के स्थान पर वो, हम-तुम का प्रयोग किया जाता है तथा किसी भी स्थान के नाम की जगह पर यहां व वहां प्रयोग किया जाता है उसे ही सर्वनाम कहा जाता है।

हिंदी व्याकरण में सर्वनाम को भी 6 भागो में बांटा जा सकता है जो इस प्रकार से निम्नलिखित है :

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम – हम, मैं, मैंने, तुम, हमें, हमने आदि।
  2. निजवाचक सर्वनाम – आप, मैं, आप, खुद, आदि।
  3. निश्रयवाचक सर्वनाम – यह, वह, मेरी, उसकी, आदि।
  4. अनिश्रयवाचक  सर्वनाम – कोई, कुछ, लगता, होगा, आदि।
  5. संबंधवाचक सर्वनाम – जो, सो, और, तथा, आदि।
  6. प्रश्नवाचक सर्वनाम – कौन, क्या, कहा, किसने, किसे, इत्यादि।

पुरुषवाचक सर्वनाम : जिस सर्वनाम शब्दों में किसी व्यक्ति या पुरुष का बोध होता हो उसे ही पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे: मैं, तुम, आप, वह आदि ।

पुरुषवाचक सर्वनाम को तीन हिस्सों में बांटा किया गया है –

  • उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम : जिस सर्वनाम में कोई व्यक्ति अपने के बारे में कुछ कहना चाहता हो या फिर ऐसे शब्दों का उपयोग करता हो जिसके द्वारा वह खुद को दर्शाता हो उसे ही उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता है।  जैसे – मैं, मेरा, मुझे, हम, हमारा, हमको इत्यादि।
  • मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम : मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम उसे कहा जाता है जिस सर्वनाम में शब्दों का उपयोग सामने खड़े किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में या फिर किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में बताने की कोशिश कर रहा हो। जैसे: तुम , तुम्हारा, तू , तेरा, आपका आपको इत्यादि। 
  • अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम : अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम के अंतर्गत जब एक व्यक्ति किसी दूसरे अन्य व्यक्ति के बारे में बातें कर रहा हो उसे ही अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे- वो , उसका , उन्हें , उसने , उनके आदि।

निजवाचक सर्वनाम : जिस सर्वनाम में तीनो पुरुषवाचक सर्वनाम के समूहों ( उत्तम, मध्यम, अन्य ) में निजत्व का बोध होता हो उसे ही निजवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे-

  • मै स्वयं खा लूंगा।
  • वो स्वयं खेल लेगा।
  • तुम स्वयं चले जाना।
  • निश्रयवाचक सर्वनाम : सर्वनाम के को शब्द किसी निश्चित व्यक्ति विशेष या किसी वस्तु को दर्शाता हो उसे ही निश्रयवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे-  यह आदमी राम है , वह किताब मेरी है, वह कलम उसकी है,  आदि।
  • अनिश्रयवाचक  सर्वनाम : हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के शब्द जब किसी अनिश्चित वस्तु या फिर मनुष्य या व्यक्ति की ओर संकेत करता हो या फिर इशारा करता हो उसे ही अनिश्रयवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे: वहा अंदर कोई व्यक्ति है , दाल में कुछ तो काला है, कोई आने वाला है, वहां पर कुछ रखा हुआ है, इत्यादि।
  • संबंधवाचक सर्वनाम : संबंधवाचक सर्वनाम में जब एक सर्वनाम वाले व्यक्ति का किसी किसी दूसरे सर्वनाम वाले व्यक्ति या फिर मनुष्य के साथ उसके संबंध को दर्शाता हो, उसे ही संबद्धवाचक सर्वनाम कहा जाता है। 

उदहारण: जैसी करनी वैसी भरनी , जिसकी लाठी उसकी भैंस, वह व्यक्ति उसका पिता है, वह विद्यार्थी उसका भाई है, इत्यादि।

  • प्रश्नवाचक सर्वनाम : प्रश्नवाचक सर्वनाम के अंतर्गत जब सर्वनाम के शब्द किसी प्रश्न को पूछते समय दर्शाते हैं या फिर सहायता करते हैं, उसे ही प्रश्नवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे:  आप कर क्या रहे हैं? , आप कहां जा रहे हैं?, क्या आपने पढ़ाई की?, क्या तुमने अपना काम खत्म किया?, इत्यादि।

विशेषण पद किसे कहते हैं?

हिंदी व्याकरण के अनुसार जो शब्द किसी भी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषताओं को दर्शाता हो जैसे – उसके गुण और दोष, उसकी संख्या, उसका परिणाम आदि का स्पष्ट बोध कराता हो उसे ही विशेषण पद कहा जाता है।

उदहारण के लिए: गोरा, बुरा, लंबा, एक, चार, दस, काला, अच्छा, खराब, घटिया, इत्यादि।

  • वहां पर चार लड़के खड़े हैं।
  • राहुल बहुत लंबा है।
  • सीता अच्छी लड़की है।
  • राम ने तीन रोटी खायी है।
  • राधा गोरी है।

क्रिया पद क्या है?

जो शब्द किसी भी कार्य के होने अथवा किसी कार्य को करने को दर्शाता है अथवा उसका बोध कराता हो, उसे ही क्रियापद कहा जाता है।

जैसे: 

  • श्याम गाना गा रहा है।
  • राधा खाना बना रही है।
  • वहां बच्चे खेल रहे हैं।
  • सीता जा रही है।

अव्यय पद क्या होता है?

हिंदी व्याकरण के अनुसार जिन शब्दों के रूप में लिंग, कारक, वचन, काल, पुरुष, समय आदि के कारण कोई विकार उत्पन्न नहीं होता हो या परिवर्तन नहीं होता हो, उसे ही अव्यय या फिर अविकार कहा जाता है। 

अव्यय शब्द के मूल रूपों में कोई भी रूपांतर नहीं किया जा है, इसीलिए अव्यय का सही अर्थ है- “जो व्यय ना हो” होता है।

उदाहरण के लिए – उधर, इधर, कब,अब, जब, कल, क्यों, आना, परन्तु, धीरे-धीरे, किन्तु, जाना इत्यादि शब्द।

संबंधबोधक का पद क्या है?

किसी वाक्य में प्रयोग किया जाने वाला संबंधबोधक पद का परिचय करने के लिए उसके भेद या फिर उसके प्रकार का और संबंधबोधक पदों से विभिन्न सम्बंधित शब्दों को ज्ञात करना होता है और उसकी व्याख्या की जाती है। 

संबंधबोधक पद का परिचय के लिए उदाहरण :-

इस बाल्टी के अन्दर एक चूहा है।

उपर्युक्त बताए गए वाक्य में अन्दर एक संबंधबोधक पद है।

अन्दर – संबंध वाचक अव्यय, इसका संबंध ‘बाल्टी’ से है।

समुच्चयबोधक का पद क्या है?

हिंदी व्याकरण के अनुसार जब वाक्य में उपस्थित किसी समुच्चयबोधक पदों का परिचय करते वक्त संबंधबोधक के भेद या फिर उसके प्रकार और समुच्चयबोधक पदों से सम्बंधित शब्दों को ज्ञात कर के उनकी व्याख्या करनी पड़ती है।

समुच्चयबोधक पद का परिचय के लिए उदाहरण:-

आज या फिर कल छुट्टी लेना ठीक होगा।

ऊपर जो वाक्य बताए गए उसमें “या” एक समुच्चयबोधक पद के रूप में लिया गया है।

“या” –  ऊपर बताए गए वाक्य में विभाजन के लिए विभाजक समुच्चय बोधक अव्यय आज और कल का विभाजक संबंध को बताया गया है।

Conclusion

हमें आशा है कि हिंदी व्याकरण में पद किसे कहते हैं? (pad kise kahate hain?) और उससे संबंधित सारी जानकारियां जैसे पद कितने प्रकार के होते हैं? यानी कि पद के प्रकार के बारे में जानकारी जान गए होंगे। 

यदि आज की आर्टिकल आपके लिए उपयोग साबित हुआ हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि उन्हें भी इसकी जानकारी हो सके। यदि आज के इस पोस्ट से संबंधित आपके मन में कोई भी प्रश्न हो तो या फिर आपके पास और भी जानकारी हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

Advertisements

Leave a Comment