Last Updated on 25 November 2022 by admin

आज के इस लेख में हम आपके साथ Bhasa kise kahate Hain, उत्पत्ति, भाषा के कितने प्रकार होते हैं? एवं इससे जुड़े अन्य जानकरियाँ आपके साथ शेयर करने जा रहे है तो अगर आप इससे जुड़ी जानकारी की तलाश कर रहे थे तो आप सही जगह आये हो। 

भाषा अपनी भावों और विचारों को दूसरों के सामने प्रकट करते हैं उसे ही भाषा कहते हैं अर्थात भाषा भाष धातु से बना हुआ एक हिस्सा जिसका अर्थ होता है सूचना। भाषा हमारे मन में उठे विचारों को दूसरों को बताने के लिए प्रकट किया जाता है। 

लेकिन कई सारे ऐसे लोग है जिसे इसके बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है और इससे जुड़े व्याकरण से भी, इसलिए हम आज इस पोस्ट के जरिये आपके साथ इससे जुड़े सभी जानकरियां शेयर करने जा रहे है तो चलिए शुरू करते है। 

Bhasa kise kahate Hain

भाषा की परिभाषा क्या है? (Bhasha ki paribhasha kya hai?)

 भाषा शब्द भाषा धातु से मिलकर बना है इसका अर्थ ‘सूचना’ होता है। इस प्रकार से भाषा एक सूचना देने का कार्य भी कर सकता है अपने भावों और अपने विचारों को प्रकट करने का यह केवल एक माध्यम नहीं है बल्कि इसके अलावा और भी कई सारी माध्यम है जिसके द्वारा आप अपने विचारों को किसी दूसरे के सामने रख सकते हैं। 

लेकिन भाषा एक ऐसा माध्यम है जिसका प्रयोग वृहद मात्रा में किया जाता है। हम कह सकते हैं कि विचारों के आदान-प्रदान के लिए सर्व प्रमुख रूप से भाषा का ही प्रयोग करते हैं।

लोगों का एक दूसरे से संपर्क का माध्यम ही भाषा कहलाता है जिसके माध्यम से दुनिया के कोई भी लोग अपनी बात को दूसरों के सामने प्रकट कर सकते हैं। भाषा एक बोली का बड़ा रूप होता है। 

बिना भाषा के किसी भी ज्ञान का प्रचार- प्रसार नहीं हो सकता है भाषा को सुव्यवस्थित तरीके से पढ़ा, लिखा और बोला जाता है, भाषा की जानकारी ना होने पर सुव्यवस्थित एवं अच्छे ढंग से अपने मन के विचारों को प्रकट करना लगभग असंभव हो जाता है।

Bhasha ki utpatti kis prakar hui?

भाषा हमारे जीवन का एक निरंतर विकसित होने वाला अंश है भाषा का विकास दिन प्रतिदिन होते रहता है। भारत विभिन्न संस्कृतियों वाला देश है अतः यहां की संस्कृति के कारण अनेक भाषाएं बोली जाती हैं यहां की संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं यही कारण है कि यहां कई अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है। 

इन सब बातों के बीच में एक प्रश्न हमारे मन में जरूर उत्पन्न होता है कि भाषा की उत्पत्ति कैसे हुई है? क्या हम भाषा को सामाजिक परिवेश से सीखते हैं या फिर हम इसके साथ ही जन्म लेते हैं? इस प्रकार की कई प्रश्न शायद आपके मन में उठे होंगे।

एक और यह धारणा चली आ रही है कि भाषा संस्कृति का एक हिस्सा है लेकिन वास्तव में, भाषा संस्कृति का हिस्सा नहीं बल्कि संस्कृत का विस्तार है। इसलिए यह पूरी तरीके से इस पर निर्भर करती है। यह धारणा इस बात की पुष्टि करता है कि भाषा का विकास पर्यावरण और संस्कृत के साथ हुआ है। 

भाषा के विकास के निरंतरता सिद्धांत किस संबंध में यह माना जाता है कि इसका विकास धीरे-धीरे हुआ होगा, मानव के शुरुआती पूर्वजों के मध्य, विभिन्न चरणों में विकसित होने वाली भिन्न भिन्न विशेषताओं के साथ-साथ, जब तक कि लोगों के भाषण आज हमारे पास नहीं हैं।

Bhasha ke udaharan क्या हैं? 

भाषा के उदाहरण (bhasha ke udaharan)  निम्नलिखित हैं:

भाषा के उदाहरण की बात की जाए तो इसमें पत्र एवं लेख के अलावा समाचार पत्र, कहानी, जीवनी, तार, संस्मरण आदि शामिल हैं।

ज्यादातर व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में लेखन प्रणाली होती है जो संकेतों या फिर ध्वनियों को रिकॉर्ड करने के लिए उपयोगी होती है। मनुष्य को अपनी बात दूसरों के सामने रखने के लिए उन्हें अपने भाव और विचारों को समझाना पड़ता है। 

लोगों के पास अपने विचारों को प्रकट करने के लिए कई साधन होते हैं जैसे – शारीरिक या फिर वस्तु संकेत के द्वारा या फिर मौखिक ध्वनि के माध्यम से या लिखित तरीके से हम इसे व्यक्त करते हैं। भाषा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचारों एवं मन की बातों को एक दूसरे के साथ आदान प्रदान करते हैं। 

भाषा के कितने प्रकार होते हैं?

  भाषा में मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है-

मौखिक भाषा:- मौखिक भाषा बोलकर या आवाज के माध्यम से हमारे मन के भावों का आदान प्रदान करते हैं उसे मौखिक भाषा कहते हैं। यह एक ऐसी भाषा है जो सामान्य तौर पर लोगों से सीधे बोली जाती है। इस भाषा में ध्वनि के द्वारा शब्दों को पिरोया जाता है।

इसके बाद अपने सामने खड़े लोगों तक अपने विचार को पहुंचाया जाता है। पढ़े, लिखे या अनपढ़ सभी इस मौखिक भाषा का उपयोग करते हैं सामान्यता सर्वाधिक प्रयोग हम मौखिक भाषा का ही करते हैं।

उदाहरण के लिए – 

• वह लड़की बहुत ज्यादा बोलती है।

• तुम्हें पता है स्कूल में परीक्षा शुरू होने वाली है।

• आज हमारे अध्यापक ने बहुत अच्छी बातें सिखाई।

• वह जोर से बोल रही है।

• उसका दिमाग बहुत तेज चलता है।

सांकेतिक भाषा:- सांकेतिक का शाब्दिक अर्थ होता है संकेत या इशारा। सांकेतिक भाषा हाथ के संकेतों ,हाव -भाव या चेहरे के भावों तथा शरीर की भाषा के माध्यम से दर्शाया जाता है उसे ही सांकेतिक भाषा कहते हैं। 

इसमें हम अपने विचारों को इशारे में दूसरे लोगों को समझा सकते हैं इस भाषा का उपयोग वे लोग करते हैं जो बोल या सुन नहीं सकते। इस प्रकार की भाषा का प्रयोग कई जगहों पर गुप्त रूप से भी किया जाता है। गोपनीय बातों को प्रकट करने के लिए भी सांकेतिक भाषा का उपयोग करते हैं।

उदाहरण के लिए –

• अपने हाथों को हिला कर हेलो कहना।

• अपने हाथों को ऊपर करके किसी को बाय कहना। 

• अपने गाल पर हाथों को रख के सामने वाले को मारने का इशारा देना आदि।

• सामने वाले को हाथ हिला कर बुलाने का इशारा।

लिखित भाषा:- मौखिक भाषा के द्वारा हम अपने विचारों और भावों के स्मरण का हूबहू अधिक दिनों तक सुरक्षित नहीं रख पाते हैं अतः उन विचारों के भावों और विचारों को लिख कर रखते हैं उसे ही लिखित भाषा कहते हैं। बोली:- भाषा के ठीक विपरीत है बोली, हमारे क्षेत्र में बोली जाने वाली मौखिक भाषा को बोली कहते हैं। 

जैसे :-ब्रज, अवधी, भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी इत्यादि। लिखित भाषा संचार का एक लिखित रूपांतरण है इसमें पढ़ना और लिखना दोनों शामिल होता है।

जिस प्रकार मौखिक भाषा को सुनकर आदान प्रदान किया जाता है ठीक उसी प्रकार लिखित भाषा को लिखकर और उसे पढ़कर अपने भाव और शब्दों का आदान प्रदान किया जाता है।अधिकतर फॉर्मल कार्यों को लिखित भाषा के रूप में ही किया जाता है।

उदाहरण के लिए – 

• मनप्रीत ने अपने भाई को पत्र में लिखा कि वह सकुशल और सुखी है।

• रामचरितमानस का दोहा तुलसीदास जी ने लिखा है।

• आलिया को एक पत्र मिला जिसमें लिखा है कि उसे नौकरी मिल गई है।

•केरल की बाढ़ के संबंध में रिपोर्ट तैयार की गई।

•हमारे देश के संबंध में निबंध लिखना।

Bhasha aur boli mein kya antar hai?

भाषा और बोली में निम्नलिखित अंतर है: 

• भाषा एक विस्तृत क्षेत्र है जिसे बहुत सारे लोग बोलते हैं जबकि बोली का छोटे क्षेत्र तक ही सीमित होती है। 

• भाषा का एक विशेष मान रूप होता है लेकिन बोली नहीं। 

• भाषा का एक लिखित रूप होता है परंतु बोली नहीं। 

• भाषा का अपना विशेष साहित्य होता है बल्कि बोली की लोक साहित्य में मिलती है। हमारे भारत में 1652 भाषाएं बोली जाती है परंतु भारत में कुल मुख्य रूप से 22 भाषाओं का दर्जा दिया गया है। 

भारतीय भाषाएं

भारत एक ऐसा देश है जिस के भीतर बहुत सारी भाषाओं को बोला जाता है। हमारे देश में किसी भी भाषा को बोलने की स्वतंत्रता है। हमारे भारत में लगभग 800 भाषाएं पाई जाती है। जिनमें से कुछ प्रमुख भाषाएं हैं जैसे – हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, उड़िया, मराठी, तेलुगू, कन्नड़, बंगाली, तमिल, उर्दू आदि। वर्ष 1950 में जब हमारे देश में संविधान को मान्यता प्राप्त हुई थी उस समय केवल 14 भाषाओं को ही मान्यता प्राप्त थी। 

वर्तमान में भारत की 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। भारत के कई छोटे-छोटे इलाकों में ऐसे कई भाषाएं बोली जाती हैं जिसको सभी लोग नहीं जानते हैं। एक ही राज्य के अंदर विभिन्न प्रकार की भाषाओं का उपयोग बोलने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कई राजकीय भाषाएं भी सभी राज्यों के अंदर होती हैं। 

भारत में एक साथ 2 भाषाएं बोलने वाले लोगों की संख्या लगभग 31.49 करोड हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यह पूरी जनसंख्या का 26% है, भारत में सबसे अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग मातृ भाषा एवं बोली के रूप में किया जाता है। वैसे तो भारत देश का कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है लेकिन हिंदी भाषा का ही प्रयोग व्यापक रूप में किया जाते हैं।

भारत के संविधान द्वारा निर्धारित उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय की राज्य भाषा अंग्रेजी ही है। ठीक उसी प्रकार अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग भाषाएं हैं। जैसे

  • हिमाचल प्रदेश- हिन्दी, पंजाबी और नेपाली
  • जम्मू एवं कश्मीर- कश्मीरी डोगरी और हिन्दी
  • हरियाणा- हिन्दी, पंजाबी और उर्दू
  • पंजाब- पंजाबी व हिन्दी
  • उत्तराखण्ड- हिन्दी उर्दू, पंजाबी और नेपाली
  • दिल्ली- हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली
  • उत्तर प्रदेश- हिन्दी व उर्दू
  • राजस्थान- हिन्दी, पंजाबी और उर्दू
  • मध्य प्रदेश- हिन्दी,मराठी और उर्दू
  • पश्चिम बंगाल- बंगाली हिन्दी, संताली, उर्दू, नेपाली
  • छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ी व हिन्दी 
  • बिहार- हिन्दी, मैथिली और उर्दू
  • झारखण्ड- हिन्दी, संताली, बंगाली और उर्दू 
  • सिक्किम- नेपाली, हिन्दी, बंगाली 

  • अरुणाचल प्रदेश- बंगाली, नेपाली, हिन्दी और असमिया
  • नागालैण्ड- बंगाली हिन्दी और नेपाली 
  • मिजोरम-  बंगाली हिन्दी और नेपाली है।
  • असम- असमिया बंगाली, हिन्दी, बोडो और नेपाली 
  • त्रिपुरा- बंगाली व हिन्दी
  • मेघालय-  बंगाली, हिन्दी और नेपाली 
  • मणिपुर- मणिपुरी, नेपाली, हिन्दी और बंगाली 
  • ओडिशा -ओड़िया हिन्दी, तेलुगु और संताली 
  • महाराष्ट्र – मराठी, हिन्दी, उर्दू और गुजराती
  • गुजरात- गुजराती, हिन्दी, सिन्धी, मराठी और उर्दू
  • कर्नाटक -कन्नड़ उर्दू, तेलुगू, मराठी और तमिल 

  • दमन और दीव – गुजराती हिन्दी और मराठी 
  • दादरा और नगर हवेली – गुजराती, हिन्दी, कोंकणी और मराठी 
  • गोवा – कोंकणी मराठी, हिन्दी और कन्नड़ 
  • आन्ध्र प्रदेश – तेलुगु उर्दू, हिन्दी और तमिल 
  • केरल – मलयालम 
  • लक्षद्वीप – मलयालम 
  • तमिलनाडु – तमिल तेलुगू, कन्नड़ और उर्दू‌ 
  • पुडुचेरी- तमिल तेलुगू, कन्नड़ और उर्दू
  • अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह – बंगाली, हिन्दी, तमिल, तेलुगू और मलयालम

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Conclusion

इस लेख में आपने सीधे सरल और स्पष्ट शब्दों में भाषा के बारे में जाना जैसे – भाषा किसे कहते हैं? (Bhasha kise kahate Hain?), भाषा के कितने भेद होते हैं? Bhasha Ke Kitne Roop Hote Hain, और उनके उदाहरण सहित सभी जानकारियां आज हमने इस आर्टिकल में दी। 

हम यहां आशा करते हैं होंगे कि आज के आर्टिकल के माध्यम से भाषा से संबंधित आपको सारी जानकारियां मिल गई होंगी। यदि इस विषय से संबंधित आपके पास कोई सवाल है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।

Originally posted 2022-08-18 23:00:16.

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